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Thursday, February 21, 2013

8 तुम्हारे प्यार के कारण ही


सब कुछ बना है जैसे
बिखर जाएगा वैसे ही 
एक न एक दिन -

न फूल बचेंगे न पत्थर

तुम्हारा सौंदर्य
मेरे शब्द
एक-न-एक दिन बिहर जाएँगे

फिर भी बचा रहेगा
हृदय के किसी कोने में हमारा प्रेम
जैसे बचा रहता है पुराने बीज में भी जीवन 

हम लौटकर फिर वापस नहीं आएंगे
जिन कागजों पर लिखी गई प्रेम की इबारतें   
वे भी धीरे-धीरे जीर्ण-शीर्ण हो जाएँगे

मगर जब भी हमारा प्यार याद किया जाएगा
मेरी प्रेम-कविताएँ उन यादों में मुखर हो उठेंगी 
मेरे शब्द तुम्हारे प्यार के कारण ही 
शायद धरती पर साबुत रहेंगे|
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8 टिप्पणियाँ:

Udan Tashtari said...

उत्तम...

वाणी गीत said...

प्रेम और शब्द तो फिर भी रहेंगे !!

डॉ. मोनिका शर्मा said...

उत्कृष्ट भाव

निहार रंजन said...

प्रेम में भींगे बेहतरीन भाव.

pran sharma said...

AAPKEE LEKHNI SE EK AUR SASHAKT KAVITA . BADHAAEE .

सुभाष नीरव said...

प्रेम और प्रेम से जुड़ी चीजें कभी खत्म नहीं होंती।

प्रतिभा सक्सेना said...


चिरंतन प्रेम-भावना को व्यक्त करती हुई कविता!

रचना दीक्षित said...

मेरे शब्द तुम्हारे प्यार के कारण ही
शायद धरती पर साबुत रहेंगे|

उत्कृष्ट प्रेमाभाव लिये सुंदर प्रस्तुति.

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